अहमदाबाद से भावनगर बाइक ट्रिप: धोलेरा एक्सप्रेसवे से होते हुए धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों की साहसिक यात्रा

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नमस्कार दोस्तों! मैं आज आपको अपनी हालिया बाइक ट्रिप के बारे में बताने जा रहा हूं। 13 दिसंबर 2025, शनिवार को मैंने अपनी यामाहा FZS हाइब्रिड बाइक पर अहमदाबाद से भावनगर की यात्रा की।
यह एक सोलो ट्रिप थी, जो धार्मिक स्थलों, प्राकृतिक नजारों और थोड़े एडवेंचर से भरी हुई थी। कुल दूरी लगभग 180 किलोमीटर थी, लेकिन रास्ते में इतने सुंदर दृश्य थे कि समय का पता ही नहीं चला। अगर आप भी बाइक ट्रिप प्लान कर रहे हैं, तो यह ब्लॉग आपके लिए परफेक्ट गाइड है। चलिए, शुरू से बताता हूं।

यात्रा की शुरुआत: अहमदाबाद से धोलेरा एक्सप्रेसवे का चुनाव
दोपहर 3 बजे मैं अहमदाबाद से निकला। मैंने धोलेरा एक्सप्रेसवे को चुना, जो अभी नया बना है और 109 किलोमीटर लंबा है। यह एक्सप्रेसवे सरखेज से शुरू होकर धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन (DSIR) से होता हुआ भावनगर की ओर जाता है। सरकारी नियमों के अनुसार, अभी बाइक्स और ऑटो की अनुमति नहीं है, क्योंकि टोल प्लाजा पूरी तरह से तैयार नहीं हुए हैं।
लेकिन चूंकि यह नया है और पूरी तरह से ऑपरेशनल नहीं हुआ, इसलिए कई लोग इस्तेमाल कर रहे हैं। मैंने भी यही रूट लिया – रोड स्मूथ है, हरे-भरे खेतों से घिरा हुआ, और ट्रैफिक कम होने से सफर आसान हो जाता है। दूरी कम होने से समय भी बचता है, लगभग 2-3 घंटे में भावनगर पहुंच सकते हैं।
अहमदाबाद से निकलते ही मुझे पेट्रोल भरवाना था, इसलिए धोलेरा कट पर हाईवे से नीचे उतरा। वहां एक पेट्रोल पंप पर फ्यूल लिया और पास के ढाबे पर चाय पी। चाय की खुशबू और गर्माहट ने सफर की थकान को दूर कर दिया। फिर वापस एक्सप्रेसवे पर चढ़ा और भावनगर की ओर बढ़ा।
रास्ते के नजारे: भाड़भिड टोल प्लाजा के बाद का जादू
भाड़भिड टोल प्लाजा के बाद रोड और भी मजेदार हो जाता है। यहां पुल, नदी और नमक के फार्म्स के सुंदर दृश्य दिखते हैं। सूरज की रोशनी में चमकते नमक के मैदान और बहती नदी का नजारा देखकर मन खुश हो गया। अगर आप फोटोग्राफी के शौकीन हैं, तो यहां रुककर कुछ क्लिक्स जरूर लें। यह हिस्सा गुजरात के ग्रामीण इलाकों की झलक देता है – हवा में नमकीन खुशबू और दूर तक फैले हुए मैदान।
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भावनगर पहुंचकर रात का ठिकाना: होटल नारायणी हेरिटेज

शाम होते-होते मैं भावनगर पहुंच गया। रात के स्टे के लिए मैंने होटल नारायणी हेरिटेज बुक किया था। यह होटल भावनगर की रॉयल फैमिली का हिस्सा है, जो पहले महाराजा का प्रशासनिक कार्यालय था। बाद में इसे कुमार शाला (बॉयज स्कूल) में बदल दिया गया। कोलोनियल स्टाइल की आर्किटेक्चर वाली यह इमारत पुराने जमाने की याद दिलाती है – गेबल्ड टाइल्ड रूफ्स, विशाल आंगन और रॉयल फील।
कमरे साफ-सुथरे और घर जैसे आरामदायक थे। यहां का स्टाफ बहुत हेल्पफुल था, और लोकेशन सिटी सेंटर में होने से आसपास घूमना आसान था। अगर आप बजट में लग्जरी चाहते हैं, तो यह परफेक्ट ऑप्शन है।
रात का डिनर होटल में नहीं किया, क्योंकि मेन्यू थोड़ा महंगा था। बाहर निकलकर लोकल ऑप्शंस ट्राई किए – गुजराती थाली और स्ट्रीट फूड। भावनगर के बाजारों में रात की रौनक देखने लायक होती है।
अगले दिन की शुरुआत: नीलंबाग पैलेस का दौरा
सुबह उठकर सबसे पहले नीलंबाग पैलेस विजिट किया। यह भी रॉयल फैमिली का हिस्सा है, जो अब हेरिटेज होटल में बदल चुका है। 19वीं सदी में बना यह पैलेस यूरोपीय और इंडियन आर्किटेक्चर का मिश्रण है – विशाल गार्डन्स, फाउंटेंस और रॉयल रूम्स। यहां घूमते हुए इतिहास की झलक मिलती है। चेकआउट के बाद बाइक उठाई और अगले डेस्टिनेशन की ओर निकल पड़ा।
यह पैलेस:
- इंडो-सारसेनिक आर्किटेक्चर में बना है
- कभी भावनगर के महाराजाओं का निवास था
- आज भी इसकी दीवारों में इतिहास की गूंज सुनाई देती है
- सुबह की धूप में पैलेस का माहौल बेहद शांत और खूबसूरत लग रहा था।
राजपरा खोडियार माता मंदिर: शांत झील किनारे का दर्शन
पहला स्टॉप था राजपरा खोइयार माता मंदिर। यह मंदिर भावनगर-राजकोट हाईवे पर राजपरा गांव से पहले पड़ता है। 1911 में बना यह मंदिर खोइयार माता को समर्पित है, जो रॉयल फैमिली और लोकल्स की कुलदेवी हैं।
यहां का वातावरण बहुत शांतिपूर्ण है – झील की लहरें और मंदिर की घंटियां। कई भक्त पैदल आते हैं, और मंदिर से जुड़ी कई कथाएं हैं। दर्शन करके मन को शांति मिली।
निश्कलंक महादेव बीच टेम्पल: समुद्र के बीच में शिव दर्शन

अगला पड़ाव था निश्कलंक महादेव टेम्पल, जो कोलियाक बीच पर स्थित है। यह भारत के दुर्लभ समुद्री मंदिरों में से एक है, जहां शिवलिंग समुद्र के बीच में हैं। लो टाइड पर पैदल जाया जा सकता है, अन्यथा पानी में डूब जाते हैं।
किंवदंती है कि पांडवों ने यहां अपने पापों को धोया था। मैंने यहां समुद्र किनारे बैठकर समय बिताया – लहरों की आवाज और ठंडी हवा। भूख लगी तो ब्रेड पकोड़ा और नारियल पानी लिया, बीच पर बैठकर खाया। यह जगह स्पिरिचुअल और रिलैक्सिंग दोनों है। अगर आप भावनगर आएं, तो इसे मिस न करें।
पड़घलिया महादेव मंदिर: अनछुआ और प्राचीन शिवलिंग

फिर मैं पड़घलिया महादेव मंदिर पहुंचा, जो हथाब गांव में है। यह एक अनविजिटेड प्लेस है, जहां ज्यादा लोग नहीं जाते, लेकिन बेहद सुंदर है। यहां स्वयंभू शिवलिंग है, जो लगभग 10,000 साल पुराना माना जाता है।
मंदिर के आसपास इमली और चीकू के पेड़ हैं। मैंने मंदिर के महाराज से पूछकर इमली तोड़ी और बैग में रख ली – ताजा और खट्टी!
कुडा बीच: शांत तट पर विश्राम
अगला डेस्टिनेशन था कुडा बीच, जो कोलियाक टेम्पल के पास है। यह एक कम भीड़भाड़ वाला बीच है, जहां सूर्योदय और सूर्यास्त के नजारे कमाल के होते हैं। मैंने यहां बाइक पार्क की और थोड़ा वॉक किया – साफ रेत, ठंडी हवा और लोकल फूड स्टॉल्स। नारियल पानी यहां सस्ता और ताजा मिलता है।
मालनाथ महादेव: पहाड़ी ट्रेकिंग और दर्शन

आखिरी स्टॉप था मालनाथ महादेव मंदिर, जो भावनगर-तलाजा रोड पर लगभग 25 किलोमीटर दूर पहाड़ियों में स्थित है। रास्ता पहाड़ों से होकर जाता है, चारों तरफ विंडमिल्स की लंबी कतारें दिखाई देती हैं – बाइक राइडिंग का असली मजा यहीं आता है, हवा के झोंके और घुमावदार रोड्स के साथ।
मंदिर पहुंचकर मैंने अपना बैग सुरक्षित मंदिर में ही रख दिया और आसपास ट्रेकिंग शुरू कर दी। ऊपर चढ़ते हुए घाटियों के मनमोहक नजारे, हरियाली, छोटे झरने और ठंडी हवा का मजा लिया – ऊंचाई से विंडमिल्स बहुत करीब लगती हैं। यह जगह उन लोगों के लिए परफेक्ट है जो अपनी ट्रिप में स्पिरिचुअल दर्शन के साथ थोड़ा एडवेंचर भी चाहते हैं। मानसून में यहां की खूबसूरती और दोगुनी हो जाती है!

वापसी का सफर: भावनगर से अहमदाबाद, शाम की आसान ड्राइव
ट्रिप के आखिरी चरण में, रविवार शाम को लगभग 6 बजे मैं भावनगर से निकला। वापसी का रूट भी वही धोलेरा एक्सप्रेसवे ही था, जो दिन के उजाले में और भी साफ-सुथरा लग रहा था। ट्रैफिक हल्का था, और सूर्यास्त के समय नमक के फार्म्स का नजारा एकदम फिल्मी था।
लगभग 2 घंटे की ड्राइव के बाद, ठीक 8 बजे मैं अहमदाबाद पहुंच गया। थकान थी, लेकिन मन तरोताजा – बाइक ने फिर कमाल कर दिया, माइलेज भी शानदार रहा। अगर आप वीकेंड ट्रिप प्लान करें, तो यह रिटर्न टाइमिंग परफेक्ट है, शाम की कूल ब्रिज और घर पहुंचने का सुकून।
यात्रा के टिप्स और बजट
- इक चेक: FZS हाइब्रिड ने अच्छा माइलेज दिया – लगभग 50 kmpl। रिटर्न पर भी कोई इश्यू नहीं।
- बजट: पेट्रोल ₹500 (राउंड ट्रिप), होटल ₹1500, फूड ₹1000 – कुल ₹3000 के आसपास।
- बेस्ट टाइम: दिसंबर-जनवरी, मौसम सुहावना। रिटर्न शाम को ही प्लान करें लाइट के लिए।
- सेफ्टी: फुल राइडिंग गियर पहनें, और लो टाइड चेक करें टेम्पल विजिट के लिए। एक्सप्रेसवे पर स्पीड लिमिट का ध्यान रखें।
गुजरात में अन्य बाइक ट्रिप्स के लिए देखें अहमदाबाद से नल सरोवर बाइक ट्रिप या गुजरात के सर्वश्रेष्ठ बाइक रूट्स.
यह ट्रिप मेरे लिए यादगार रही – स्पिरिचुअलिटी, नेचर और एडवेंचर का परफेक्ट मिक्स। अगर आप प्लान कर रहे हैं, तो कमेंट्स में बताएं!
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डिस्क्लेमर:
- यह ब्लॉग केवल सूचनात्मक उद्देश्य से है।
- यात्रा से पहले मौसम, रोड कंडीशन्स और टाइड टाइमिंग्स चेक करें।
- फीस, टाइमिंग्स में बदलाव संभव है – ऑफिशियल सोर्स से वेरिफाई करें। सेफ ट्रैवल!







